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नेपाल में लोकतंत्र को समर्थन देने का भारत का वचन: प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री ओली की मुलाकात में हुई चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैंकॉक में BIMSTEC शिखर सम्मेलन के दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली से मुलाकात की और नेपाल में लोकतंत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने 4 अप्रैल 2025 को बैंकॉक में आयोजित छठे BIMSTEC (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) शिखर सम्मेलन के दौरान एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और नेपाल के बीच "विशिष्ट और घनिष्ठ" संबंधों की समीक्षा की और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की।

बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल में लोकतंत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि भारत नेपाल में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का समर्थन करता है और वहां की स्थिरता और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नेपाल में हाल ही में हुई घटनाओं, विशेष रूप से राजशाही समर्थक प्रदर्शनों के संदर्भ में, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।

दोनों नेताओं ने ऊर्जा, कनेक्टिविटी, संस्कृति और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हमने भारत-नेपाल मित्रता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की, विशेष रूप से ऊर्जा, कनेक्टिविटी, संस्कृति और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में।"

प्रधानमंत्री ओली ने बैठक को "अंतरंग और सार्थक" बताया और कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर प्रसन्न हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बहुआयामी साझेदारी को और गहरा करने के लिए वे मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब नेपाल में राजशाही समर्थक प्रदर्शनों के कारण आंतरिक तनाव बढ़ा हुआ है। प्रधानमंत्री ओली ने इन प्रदर्शनों के पीछे बाहरी हस्तक्षेप की संभावना पर चिंता व्यक्त की थी। इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री मोदी का नेपाल में लोकतंत्र के प्रति समर्थन व्यक्त करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक से भारत-नेपाल संबंधों में नई ऊर्जा का संचार होगा और दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग में वृद्धि होगी।