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Anant Ambani Padyatra : अनंत अंबानी की 180 किमी पदयात्रा: श्रद्धा और संकल्प का प्रतीक

रिलायंस इंडस्ट्रीज के निदेशक अनंत अंबानी ने अपने 30वें जन्मदिन से पूर्व जामनगर से द्वारकाधीश मंदिर तक लगभग 180 किलोमीटर की पदयात्रा प्रारंभ की है, जो उनकी गहरी धार्मिक आस्था और संकल्प का प्रतीक है।

रिलायंस ग्रुप के उत्तराधिकारी अनंत अंबानी इन दिनों अपने आध्यात्मिक पक्ष के लिए चर्चाओं में हैं। उन्होंने अपने 30वें जन्मदिन से पहले एक खास संकल्प लिया है — जामनगर से द्वारकाधीश मंदिर तक लगभग 180 किलोमीटर लंबी पदयात्रा। यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक कर्म नहीं बल्कि उनके जीवन के दर्शन को उजागर करती है।

अनंत अंबानी की यह यात्रा 29 मार्च 2025 को शुरू हुई और अनुमान है कि यह 8 अप्रैल 2025 तक पूरी होगी। इस यात्रा का लक्ष्य भगवान द्वारकाधीश के दर्शन करना है, और यह संपूर्ण यात्रा गुजरात के पवित्र मार्गों से होकर गुज़र रही है।

पदयात्रा के दौरान अनंत प्रतिदिन 20 से 25 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं। वे साधारण कपड़ों में, बिना किसी विशेष व्यवस्था के, आम लोगों की तरह चल रहे हैं। साथ ही, हर दिन मंदिरों में रुककर पूजा-अर्चना भी कर रहे हैं। यह यात्रा उनके धार्मिक विश्वास और सादगीपूर्ण जीवनशैली को दर्शाती है।

सबसे खास बात यह रही कि यात्रा के दौरान अनंत अंबानी ने एक ट्रक में भरी मुर्गियों को मुक्त कराया, जिससे पता चलता है कि उनमें पशु प्रेम और दया भावना भी गहराई से समाहित है। यह कार्य न सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बल्कि लोगों के दिलों को भी छू गया।

अनंत अंबानी की यह यात्रा एक प्रेरणा है। जहां आज के युवा बड़े-बड़े सेलिब्रेशन में यकीन रखते हैं, वहीं अनंत ने सादगी, भक्ति और शांति को प्राथमिकता दी। उनका यह कदम देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है और सोशल मीडिया पर #AnantAmbani ट्रेंड कर रहा है।

विशेषज्ञों की मानें तो अनंत अंबानी की पदयात्रा एक ब्रांड इमेजिंग का हिस्सा नहीं, बल्कि एक निजी श्रद्धा और संकल्प का परिणाम है। वह पहले भी कई मौकों पर अपने आध्यात्मिक स्वभाव का परिचय दे चुके हैं। इससे पहले उन्होंने वृंदावन और केदारनाथ जैसे स्थलों पर भी गुप्त यात्राएं की थीं।

इस पदयात्रा को लेकर न सिर्फ अंबानी परिवार, बल्कि उनके चाहने वाले और देशभर के लोग भी भावुक हो गए हैं। लोग उन्हें सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं दे रहे हैं और कई लोग तो इस यात्रा में कुछ दूरी तक उनका साथ भी दे रहे हैं।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस पदयात्रा की शुरुआत उनके निजी इरादे से हुई, लेकिन इसका संदेश सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर गहराई से महसूस किया जा रहा है।