स्वयंभू धर्मगुरु नित्यानंद, जो भारत में यौन शोषण और अपहरण के आरोपों के बाद 2019 में फरार हो गए थे, ने 'संयुक्त राज्य कैलासा' नामक एक काल्पनिक राष्ट्र की स्थापना का दावा किया था। हाल ही में, इस तथाकथित राष्ट्र के प्रतिनिधियों द्वारा दक्षिण अमेरिकी देश बोलिविया में ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिशों का खुलासा हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैल गई है।
बोलिविया में ज़मीन हथियाने की साजिश बोलिविया के अधिकारियों के अनुसार, 'कैलासा' से जुड़े लगभग 20 व्यक्तियों ने वहां के स्वदेशी समुदायों के साथ 1,000 वर्षों के लिए अमेज़न के विशाल भूभागों को पट्टे पर लेने के समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। इन समझौतों को 'भूमि तस्करी' के रूप में देखा गया, जिसके परिणामस्वरूप इन व्यक्तियों को गिरफ्तार कर उनके मूल देशों—भारत, अमेरिका, स्वीडन और चीन—में निर्वासित कर दिया गया।
'कैलासा' के प्रतिनिधियों ने पहले स्वदेशी समूहों को जंगल की आग से निपटने में सहायता का वादा किया था। इसके बाद, उन्होंने इन समुदायों के साथ 25 वर्षों के लिए वार्षिक $200,000 के बदले भूमि पट्टे का समझौता किया। हालांकि, बाद में प्रस्तुत दस्तावेज़ों में यह अवधि 1,000 वर्षों की थी, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की अनुमति भी शामिल थी। इस धोखाधड़ी का एहसास होने पर, स्वदेशी नेताओं ने इसे गलती माना और अधिकारियों को सूचित किया।
बोलिवियाई सरकार की प्रतिक्रिया बोलिविया के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वे 'संयुक्त राज्य कैलासा' को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देते हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार के राजनयिक संबंध नहीं रखते हैं। सरकार ने इन समझौतों को अवैध घोषित किया और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की।
नित्यानंद और 'कैलासा' की पृष्ठभूमि नित्यानंद, जिनका असली नाम अरुणाचलम राजसेकरन है, तमिलनाडु के रहने वाले हैं। 2019 में भारत से फरार होने के बाद, उन्होंने 'कैलासा' नामक एक काल्पनिक राष्ट्र की स्थापना का दावा किया, जिसमें अपना संविधान, मुद्रा और पासपोर्ट होने का दावा किया गया। हालांकि, इस तथाकथित राष्ट्र को किसी भी मान्यता प्राप्त देश या अंतरराष्ट्रीय संगठन से मान्यता नहीं मिली है।
नित्यानंद और उनके अनुयायियों की यह हालिया गतिविधि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। बोलिविया में उनकी ज़मीन हथियाने की कोशिशों ने उनके तथाकथित राष्ट्र 'कैलासा' की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला दर्शाता है कि कैसे एक भगोड़ा अपराधी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धोखाधड़ी करने की कोशिश कर सकता है, और इसे रोकने के लिए सतर्कता आवश्यक है।