संसद का बजट सत्र 2025: ऐतिहासिक उपलब्धियाँ और वक्फ (संशोधन) विधेयक पर मैराथन बहस

संसद का बजट सत्र 2025 में कुल 16 विधेयक पारित हुए, जिनमें वक्फ (संशोधन) विधेयक पर राज्यसभा में 17 घंटे से अधिक की ऐतिहासिक बहस शामिल है, जिससे संसदीय उत्पादकता 100% से अधिक रही।

नई दिल्ली: संसद का बजट सत्र 2025, जो 31 जनवरी को प्रारंभ हुआ था, 4 अप्रैल को संपन्न हुआ। इस सत्र में कुल 16 विधेयक पारित किए गए, जिनमें वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025, वित्त विधेयक 2025, और आप्रवासन और विदेशियों से संबंधित विधेयक प्रमुख हैं।

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पर ऐतिहासिक बहस वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पर संसद में मैराथन बहस हुई, जो संसदीय इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित करती है। लोकसभा में इस विधेयक पर लगभग 14 घंटे तक चर्चा हुई, जबकि राज्यसभा में यह बहस रात 4:02 बजे तक चली, जो हाल के वर्षों में सबसे लंबी बैठकों में से एक है।

विधेयकों की प्रमुख विशेषताएँ वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। विधेयक में केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रस्ताव है, जिससे विविधता और समावेशिता को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, इस प्रावधान को लेकर विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने आपत्ति जताई है, उनका मानना है कि यह मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है।

सत्र की उत्पादकता और अन्य महत्वपूर्ण घटनाएँ बजट सत्र 2025 में लोकसभा और राज्यसभा दोनों की उत्पादकता 100% से अधिक रही। राज्यसभा ने बिना किसी अवकाश के 17 घंटे से अधिक की बैठक की, जो संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।इसके अलावा, 3 अप्रैल को शून्यकाल के दौरान लोकसभा में 202 सांसदों ने सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाए, जो एक नया रिकॉर्ड है। इससे पहले, जुलाई 2019 में 161 सांसदों ने शून्यकाल में भाग लिया था।

विपक्ष और सरकार के बीच बढ़ता विभाजन बजट सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद गहरे होते दिखे। विपक्षी दलों ने वक्फ (संशोधन) विधेयक सहित कई मुद्दों पर सरकार की आलोचना की और कुछ मौकों पर सदन से वॉकआउट भी किया। हालांकि, अधिकांश समय बहस और चर्चा के माध्यम से मुद्दों को उठाया गया, जिससे संसदीय कार्यवाही में व्यवधान कम हुआ।

  बजट सत्र 2025 ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने और संसदीय प्रक्रियाओं में उच्च उत्पादकता के साथ इतिहास रचा है। वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विस्तृत और लंबी बहस ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की जीवंतता को प्रदर्शित किया। हालांकि, सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते मतभेद भविष्य में राजनीतिक परिदृश्य को कैसे प्रभावित करेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।