देश विदेश

​केरल के मुनंबम में वक्फ बोर्ड के भूमि दावे पर विवाद: 600 ईसाई परिवारों के बेदखली का खतरा, भाजपा का समर्थन बढ़ा

केरल के मुनंबम गांव में वक्फ बोर्ड द्वारा भूमि पर दावा किए जाने से लगभग 600 ईसाई परिवार बेदखली के खतरे का सामना कर रहे हैं। भाजपा और केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल ने उनका समर्थन किया है, जबकि विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर अलग राय व्यक्त की है।

केरल के एर्नाकुलम जिले के मुनंबम गांव में लगभग 600 ईसाई परिवारों को वक्फ बोर्ड द्वारा उनकी पुश्तैनी जमीन पर दावा करने के कारण बेदखली का सामना करना पड़ रहा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब केरल वक्फ बोर्ड ने इस भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित किया, जिससे वहां के निवासियों में असंतोष फैल गया।

भूमि विवाद की पृष्ठभूमि: मुनंबम एक तटीय गांव है जहां अधिकांश निवासी मछुआरे हैं और पीढ़ियों से इस भूमि पर बसे हुए हैं। सितंबर 2024 में, केरल वक्फ बोर्ड ने अचानक इस भूमि पर अपना दावा प्रस्तुत किया, जिससे स्थानीय समुदाय में चिंता और विरोध की लहर दौड़ गई। निवासियों का कहना है कि वे इस भूमि पर दशकों से रह रहे हैं और उनके पास इसके स्वामित्व के वैध दस्तावेज हैं।

भाजपा का समर्थन और राजनीतिक प्रतिक्रिया: इस विवाद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्थानीय निवासियों का समर्थन किया है। भाजपा के प्रवक्ता के.वी.एस. हरिदास ने कहा, "हमने देखा है कि कांग्रेस, सीपीआई(एम) और इंडिया फ्रंट वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं। लेकिन केरल में, 400-500 एकड़ भूमि, जहां ईसाई मछुआरे रह रहे हैं, को वक्फ संपत्ति माना जा रहा है। वे दशकों से जिस भूमि पर रह रहे हैं, वहां से बेदखली का खतरा झेल रहे हैं।

कैथोलिक चर्च का समर्थन: केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (KCBC) ने भी वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन किया है। उन्होंने केरल के सांसदों से इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की है, ताकि मुनंबम के निवासियों को न्याय मिल सके। KCBC का मानना है कि वर्तमान वक्फ कानूनों के कुछ प्रावधान भारतीय संविधान और देश के धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं।

विपक्ष की प्रतिक्रिया: हालांकि, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) जैसे विपक्षी दलों ने भाजपा के दावों को "प्रचार" करार दिया है। IUML के राज्यसभा सांसद हारिस बीरन ने कहा कि उनकी पार्टी के नेता KCBC के साथ संपर्क में हैं ताकि मुनंबम मुद्दे का समाधान निकाला जा सके।

विधेयक का उद्देश्य और विवाद: वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और गैर-मुस्लिम सदस्यों को वक्फ बोर्ड में शामिल करना है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के अधिकारों को कमजोर कर सकता है और धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता पर असर डाल सकता है।

मुनंबम में वक्फ बोर्ड के भूमि दावे ने स्थानीय ईसाई समुदाय में गहरी चिंता पैदा की है। भाजपा और कैथोलिक चर्च जैसे संगठनों के समर्थन के बावजूद, यह विवाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विधेयक और इससे जुड़े विवाद कैसे आगे बढ़ते हैं और स्थानीय समुदायों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।