नई दिल्ली, 3 अप्रैल 2025: पंजाब के मोहाली की एक अदालत ने स्वयंभू पादरी बजिंदर सिंह को 2018 में दर्ज बलात्कार के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रांत कुमार ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि बजिंदर सिंह ने अपने उपदेशक के पद का दुरुपयोग करते हुए एक महिला के साथ जघन्य अपराध किया है।
बचपन और प्रारंभिक जीवन: बजिंदर सिंह का जन्म 10 सितंबर 1982 को हरियाणा के यमुनानगर में एक जाट परिवार में हुआ था। किशोरावस्था में, वह आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो गए और 2000 के दशक की शुरुआत में हत्या के एक मामले में जेल गए। जेल में रहते हुए, उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया और रिहाई के बाद 'चंगाई सभाओं' के माध्यम से प्रचार करना शुरू किया।
2012 में, बजिंदर सिंह ने 'चर्च ऑफ ग्लोरी एंड विजडम' की स्थापना की, जो पंजाब और अन्य स्थानों पर कई शाखाओं के साथ एक प्रमुख निजी चर्च बन गया। उन्होंने चमत्कारी उपचार और दिव्य चंगाई के दावे किए, जिससे उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। उनके यूट्यूब चैनल 'प्रॉफेट बजिंदर सिंह' के लगभग 3.7 मिलियन सब्सक्राइबर हैं, जहां वह अपने उपदेश और चंगाई सत्र प्रसारित करते थे।
बजिंदर सिंह का करियर विवादों से घिरा रहा है। 2018 में, एक महिला ने उन पर विदेश भेजने का झांसा देकर बलात्कार करने और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया। इस मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया और बाद में जमानत पर रिहा किया गया।
इसके अलावा, फरवरी 2025 में, एक पूर्व अनुयायी ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया, जिसके बाद पंजाब पुलिस ने जांच शुरू की। मार्च 2025 में, एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें बजिंदर सिंह को अपने कार्यालय में एक पुरुष और महिला के साथ दुर्व्यवहार करते हुए देखा गया।
अदालत का फैसला: 28 मार्च 2025 को, मोहाली की एक विशेष अदालत ने बजिंदर सिंह को 2018 के बलात्कार मामले में दोषी ठहराया। 1 अप्रैल 2025 को, उन्हें आजीवन कारावास और 1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उन्होंने एक उपदेशक के रूप में अपनी स्थिति का दुरुपयोग करते हुए महिला के साथ जघन्य अपराध किया।
पीड़िता की प्रतिक्रिया: सजा के बाद, पीड़िता ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं बहुत खुश हूं। मैं न्यायपालिका, अपने वकील और मीडिया का धन्यवाद करती हूं।
बजिंदर सिंह के मामले ने धार्मिक नेताओं की जवाबदेही और उनके अनुयायियों पर उनके प्रभाव के बारे में महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं। उनके अनुयायियों की बड़ी संख्या और उनकी चमत्कारी दावों की व्यापक पहुंच ने समाज में गहरी चर्चा को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं और अनुयायियों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।