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​बैंकॉक में BIMSTEC डिनर में पीएम मोदी और बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की निकटता से संभावित द्विपक्षीय वार्ता की अटकलें तेज़

बैंकॉक में BIMSTEC डिनर के दौरान पीएम मोदी और बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की निकटता से दोनों देशों के बीच संभावित द्विपक्षीय वार्ता की अटकलें तेज़ हो गई हैं, खासकर हाल के विवादास्पद बयानों और तनावपूर्ण संबंधों के संदर्भ में।

बैंकॉक में आयोजित BIMSTEC (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) शिखर सम्मेलन के आधिकारिक डिनर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को एक साथ बैठा देखा गया। इस बैठक व्यवस्था ने दोनों नेताओं के बीच संभावित द्विपक्षीय वार्ता की अटकलों को जन्म दिया है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव की पृष्ठभूमि: 2024 में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। भारत ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर चिंता व्यक्त की थी, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दूरी बढ़ी।

मोहम्मद यूनुस के विवादास्पद बयान: हाल ही में, मोहम्मद यूनुस ने चीन की यात्रा के दौरान भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को "लैंडलॉक्ड" (स्थल-आवेष्ठित) बताते हुए कहा कि इन राज्यों की समुद्र तक पहुंच नहीं है और बांग्लादेश इस क्षेत्र में समुद्र का एकमात्र संरक्षक है। उन्होंने चीन को बांग्लादेश में आर्थिक निवेश के लिए आमंत्रित किया, जिसे भारतीय राजनेताओं ने उकसाने वाला माना।

भारतीय प्रतिक्रिया: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने BIMSTEC बैठक में इस बयान का परोक्ष रूप से जवाब देते हुए कहा कि भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र एक क्षेत्रीय कनेक्टिविटी हब बन सकता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि भारत अपने पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी को लेकर गंभीर है।

बांग्लादेश की ओर से बैठक का अनुरोध: बांग्लादेश ने औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री मोदी और मोहम्मद यूनुस के बीच बैठक का अनुरोध किया है, लेकिन भारत की ओर से अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है। बांग्लादेश के विदेश सचिव ने कहा कि वे भारत की सकारात्मक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

 बैंकॉक में BIMSTEC शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की निकटता ने दोनों देशों के बीच संभावित द्विपक्षीय वार्ता की संभावनाओं को बढ़ा दिया है। हालांकि, हाल के विवादास्पद बयानों और तनावपूर्ण संबंधों के मद्देनजर, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह बैठक संबंधों में सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम उठाती है।