'ऐतिहासिक क्षण': वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने पर बोले पीएम मोदी - 'लंबे समय से हाशिये पर रहे लोगों को मिलेगा सहारा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 के संसद में पारित होने को 'ऐतिहासिक क्षण' बताया, जो हाशिये पर रहे लोगों को सहारा देगा। विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना है, हालांकि विपक्ष और मुस्लिम संगठनों ने इसे अल्पसंख्यक अधिकारों पर हमला बताया है।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 के संसद में पारित होने को 'ऐतिहासिक क्षण' करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक समाज के उन वर्गों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगा, जो लंबे समय से हाशिये पर रहे हैं और जिन्हें अब तक आवाज़ और अवसर नहीं मिले थे।

विधेयक का उद्देश्य और प्रावधान: वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 का मुख्य उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और कुशलता लाना है। इस विधेयक के तहत वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान है, जिससे प्रबंधन में विविधता और समावेशिता बढ़ेगी। इसके अलावा, सरकार को विवादित वक्फ संपत्तियों के स्वामित्व का निर्धारण करने का अधिकार दिया गया है, जिससे संपत्तियों के स्वामित्व से जुड़े विवादों का समाधान हो सके।

संसद में पारित होने की प्रक्रिया: यह विवादास्पद विधेयक लोकसभा में बुधवार को और राज्यसभा में गुरुवार को पारित हुआ। राज्यसभा में इस पर 13 घंटे से अधिक समय तक बहस हुई, जिसमें 128 वोट विधेयक के पक्ष में और 95 वोट विरोध में पड़े। लोकसभा में इसे 288 समर्थन और 232 विरोधी वोटों के साथ मंजूरी मिली।

विपक्ष और मुस्लिम संगठनों की प्रतिक्रिया: कई मुस्लिम समूह और विपक्षी दल इस विधेयक को भेदभावपूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित मानते हैं। उनका कहना है कि यह अल्पसंख्यक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास है और इससे मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ेगा। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एक अधिकारी कमाल फारूकी ने सवाल उठाया, "वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों के लिए दो पद आरक्षित करना ठीक है, लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि हिंदू मंदिरों के बोर्ड में मुसलमानों को भी इसी तरह का आरक्षण मिलेगा?

सरकार का पक्ष: अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह भ्रष्टाचार को समाप्त करेगा और संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाएगा। उन्होंने इसे 'प्रो-मुस्लिम सुधार' के रूप में देखा जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री  मोदी ने अपने बयान में कहा, "वक्फ (संशोधन) विधेयक और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक का दोनों सदनों द्वारा पारित होना हमारे सामूहिक सामाजिक-आर्थिक न्याय, पारदर्शिता और समावेशी विकास की खोज में एक ऐतिहासिक क्षण है। यह विशेष रूप से उन लोगों की मदद करेगा जो लंबे समय से हाशिये पर रहे हैं, जिन्हें अब तक आवाज़ और अवसर नहीं मिले थे।

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 का पारित होना भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना है। जहां सरकार इसे पारदर्शिता और समावेशिता की दिशा में उठाया गया कदम मानती है, वहीं विपक्ष और मुस्लिम संगठन इसे अल्पसंख्यक अधिकारों पर हमला मानते हैं। आने वाले समय में इस विधेयक का प्रभाव और इसके परिणाम स्पष्ट होंगे।