पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने हाल ही में मणिपुर हिंसा को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस हिंसा के पीछे छिपी वजहों का खुलासा किया और साथ ही मेघालय के मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधा। इस बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और मणिपुर की स्थिति को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
मणिपुर में क्यों भड़की थी हिंसा? पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के अनुसार, मणिपुर में हुई हिंसा की सबसे बड़ी वजह जातीय संघर्ष और बाहरी हस्तक्षेप था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी संगठनों ने इस हिंसा को और भड़काने का काम किया। इसके अलावा, अवैध घुसपैठ और नशीले पदार्थों की तस्करी भी इस संकट को बढ़ाने वाले बड़े कारक थे।
उन्होंने कहा कि मणिपुर में कई वर्षों से कुकी और मैतेई समुदायों के बीच तनाव बना हुआ था, लेकिन इसे जानबूझकर बढ़ावा दिया गया। अवैध घुसपैठियों ने इस स्थिति को और बिगाड़ने का काम किया। बीरेन सिंह ने यह भी कहा कि राज्य की सरकार ने स्थिति को काबू में लाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन कुछ राजनीतिक ताकतों ने इसे और भड़काने का काम किया।
मेघालय के मुख्यमंत्री पर निशाना पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अपने बयान में मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि मेघालय सरकार की नीतियों ने भी इस संघर्ष को और बढ़ावा दिया है। उनका आरोप है कि मेघालय में कई ऐसे संगठन सक्रिय हैं, जो मणिपुर में जातीय और सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और पूर्वोत्तर के राज्यों में शांति बनाए रखने के लिए एक सख्त नीति अपनानी चाहिए।
हिंसा पर राजनीतिक प्रतिक्रिया बीरेन सिंह के इस बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कई राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी सरकार मणिपुर हिंसा की जिम्मेदारी से भाग रही है और पूर्व मुख्यमंत्री अब दूसरों पर आरोप लगा रहे हैं।
वहीं, बीजेपी ने बीरेन सिंह का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य में शांति स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार पूरी कोशिश कर रही है और जल्द ही इस मुद्दे का समाधान निकाल लिया जाएगा।
क्या हो सकता है समाधान? मणिपुर में जारी संकट का समाधान निकालने के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर काम कर रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने भी इस मामले में संविधान और कानून के दायरे में रहकर हल निकालने की अपील की है।
सरकार का मानना है कि अवैध घुसपैठ, मादक पदार्थों की तस्करी और बाहरी हस्तक्षेप को रोककर ही इस समस्या को हल किया जा सकता है। साथ ही, दोनों समुदायों के बीच संवाद और सहमति बनाने की भी जरूरत है।
मणिपुर हिंसा को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। उन्होंने जातीय संघर्ष, अवैध घुसपैठ और बाहरी हस्तक्षेप को इस हिंसा की बड़ी वजह बताया है। साथ ही, उन्होंने मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा पर भी निशाना साधा। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या ठोस कदम उठाती है और क्या भविष्य में मणिपुर में स्थायी शांति स्थापित हो पाएगी या नहीं।