नई दिल्ली: आज, 2 अप्रैल 2025 को, लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पेश किया जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू प्रश्नकाल के बाद दोपहर 12 बजे इस विधेयक को सदन में प्रस्तुत करेंगे। स्पीकर ओम बिरला ने विधेयक पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय निर्धारित किया है, जिसमें से NDA को 4 घंटे 40 मिनट और विपक्ष को शेष समय दिया गया है।
सरकार को सहयोगी दलों का समर्थन चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने विधेयक के समर्थन की घोषणा की है। दोनों दलों ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है।
विपक्ष की रणनीति और संभावित हंगामा विपक्षी दलों ने विधेयक का विरोध करने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने अपने लोकसभा सांसदों को अगले तीन दिनों तक सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार उनकी आवाज दबा रही है और विधेयक को जल्दबाजी में पारित करना चाहती है।
विधेयक का उद्देश्य और पृष्ठभूमि वक्फ अधिनियम, 1995 में यह पहला संशोधन नहीं है; 2013 में भी इसमें बदलाव किए गए थे। वर्तमान संशोधन का मुख्य उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और संचालन में सुधार करना है। विधेयक को पहले संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया था, जिसने लगभग 97 लाख सुझाव प्राप्त किए थे।
संसद में संभावित परिदृश्य लोकसभा में NDA के पास पर्याप्त संख्याबल है, जिससे विधेयक के पारित होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, विपक्ष के विरोध और संभावित हंगामे के कारण चर्चा के दौरान तीखी बहस होने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य है कि इस सत्र के शेष दो दिनों में राज्यसभा से भी विधेयक को पारित कराया जाए।
संभावित प्रभाव और प्रतिक्रियाएं विधेयक के पारित होने से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और कुशलता बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, कुछ मुस्लिम संगठनों और नेताओं ने आशंका जताई है कि यह संशोधन वक्फ संपत्तियों के हित में नहीं है। लखनऊ ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा, "ये संशोधन वक्फ संपत्तियों के हित में नहीं हैं। वक्फ हमारे शरीयत, हमारे धर्म का अभिन्न अंग है और यह मुसलमानों द्वारा और मुसलमानों के लिए है।"
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पर आज लोकसभा में होने वाली चर्चा और मतदान भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकते हैं। सरकार और विपक्ष के बीच की यह बहस न केवल विधेयक के भविष्य को निर्धारित करेगी, बल्कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और मुस्लिम समुदाय पर इसके प्रभाव को भी उजागर करेगी।