नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान वक्फ संशोधन बिल को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सरकार ने घोषणा की है कि यह बिल 2 अप्रैल 2025 को दोपहर 12 बजे लोकसभा में पेश किया जाएगा, जिसमें लगभग 8 घंटे की चर्चा का समय निर्धारित किया गया है। हालांकि, विपक्षी दलों ने इस बिल पर 12 घंटे की विस्तृत चर्चा की मांग की है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पहले ही स्पष्ट किया था कि सरकार वक्फ संशोधन विधेयक को संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि इस बिल पर संसद के बाहर व्यापक विचार-विमर्श हो चुके हैं, और अब समय है कि सदन में भी इस पर बहस और चर्चा हो।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: विपक्षी दलों ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक के दौरान बिल पर 12 घंटे की चर्चा की मांग की थी। सरकार द्वारा 8 घंटे की चर्चा के प्रस्ताव के बाद, विपक्षी सदस्यों ने बैठक से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण बिल पर विस्तृत चर्चा आवश्यक है ताकि सभी पहलुओं पर विचार किया जा सके।
सदन में संख्या बल: लोकसभा में कुल 542 सदस्य हैं, जिसमें बीजेपी के 240 सांसद हैं। सहयोगी दलों को मिलाकर एनडीए के पास 294 सांसद हैं, जो बहुमत के आंकड़े 272 से अधिक है। वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के पास 233 सांसद हैं। राज्यसभा में कुल 236 सदस्य हैं, जिसमें बीजेपी के 98 सदस्य और एनडीए के कुल 115 सदस्य हैं। 6 मनोनीत सदस्यों को मिलाकर यह संख्या 121 तक पहुंचती है, जो बहुमत के आंकड़े 119 से अधिक है।
बिल के प्रमुख प्रावधान:
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वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को अंतिम माना जाता था, लेकिन नए संशोधन के तहत संपत्ति विवादों में हाईकोर्ट में अपील की जा सकेगी।
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पहले, किसी संपत्ति को केवल दावे के आधार पर वक्फ की संपत्ति घोषित किया जा सकता था। नए बिल में प्रावधान है कि बिना दान के, वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति पर अधिकार नहीं जता सकेगा।
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कलेक्टर को संपत्ति का सर्वेक्षण करने और संपत्ति निर्धारण का अधिकार दिया गया है।
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वक्फ बोर्ड में महिला और अन्य धर्मों से दो सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान किया गया है, जो पहले नहीं था।
राजनीतिक दलों का रुख:
वक्फ संशोधन बिल को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद स्पष्ट हैं। कुछ दल सरकार के साथ खड़े हैं, जबकि अन्य विरोध में हैं। लोकसभा और राज्यसभा में संख्या बल को देखते हुए, यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन से दल बिल के समर्थन में वोट करेंगे और कौन विरोध में।
वक्फ संशोधन बिल को लेकर संसद में राजनीतिक तापमान बढ़ता जा रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा के समय को लेकर मतभेद हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह बिल संसद में व्यापक बहस का विषय बनेगा। अब देखना यह है कि क्या सरकार विपक्ष की मांगों को मानते हुए चर्चा का समय बढ़ाती है या निर्धारित 8 घंटे में ही बिल को पारित कराने का प्रयास करती है।