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UP News: कमीशनखोरी मामले में निलंबित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश और बिचौलिए निकांत जैन की मुश्किलें बढ़ीं, ED जल्द शुरू कर सकता है जांच

उत्तर प्रदेश में निलंबित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश और बिचौलिए निकांत जैन के खिलाफ कमीशनखोरी के आरोपों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) जल्द ही जांच शुरू कर सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विजिलेंस विभाग ने भी संपत्ति की जांच शुरू कर दी है।​

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत निलंबित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश और बिचौलिए निकांत जैन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इन्वेस्ट यूपी के सीईओ पद पर रहते हुए अभिषेक प्रकाश पर एक सोलर ऊर्जा कंपनी से 5% कमीशन मांगने का आरोप है, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। अब, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में जांच शुरू करने की तैयारी में है।

  SAEL Solar P6 प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि विश्वजीत दत्ता ने शिकायत की थी कि वे उत्तर प्रदेश में सोलर सेल, सोलर पैनल और सोलर प्लांट के पुर्जे बनाने की फैक्ट्री स्थापित करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने इन्वेस्ट यूपी के तहत Letter of Comfort (LOC) के लिए आवेदन किया था, लेकिन कमीशन न देने के कारण उनकी फाइल बार-बार टाली जा रही थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, अभिषेक प्रकाश ने उन्हें निकांत जैन से मिलने को कहा और स्पष्ट किया कि यदि जैन सहमति देंगे, तभी संस्तुति होगी। जब दत्ता निकांत जैन से मिले, तो उन्होंने 5% कमीशन की मांग रखी। हालांकि, 12 मार्च 2025 को हुई मूल्यांकन समिति की बैठक में कंपनी को LOC जारी करने की संस्तुति कर दी गई थी, लेकिन अभिषेक प्रकाश ने इसे फिर से पुनर्मूल्यांकन करने का आदेश दे दिया।

 मुख्यमंत्री की सख्त कार्रवाई:मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में आने पर उन्होंने पूरी पत्रावली मंगवाई और जांच के आदेश दिए। जांच में फाइल पर की गई तारीखवार टिप्पणियों और अधिकारियों से पूछताछ के बाद गड़बड़ियों की पुष्टि हुई। इसके बाद, विश्वजीत दत्ता की शिकायत पर लखनऊ के गोमती नगर थाने में निकांत जैन के खिलाफ FIR दर्ज करवाई गई। पुलिस ने निकांत जैन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वहीं, मुख्यमंत्री ने कड़ा फैसला लेते हुए IAS अभिषेक प्रकाश को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए।

विजिलेंस और ED की जांच: निलंबन के बाद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभिषेक प्रकाश की संपत्ति की विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं। विजिलेंस विंग अब बरेली, पीलीभीत, हमीरपुर और लखनऊ में तैनाती के दौरान अभिषेक प्रकाश द्वारा जुटाई गई संपत्ति का ब्यौरा जुटा रही है। इसके अलावा, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस प्रकरण में जांच शुरू करने की तैयारी में है, जिससे अभिषेक प्रकाश और निकांत जैन की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

निकांत जैन की गिरफ्तारी और पूछताछ: पुलिस की पूछताछ में निकांत जैन ने स्वीकार किया है कि उसने अभिषेक प्रकाश के कहने पर ही यह डील हाथ में ली थी। पहले वह बरगलाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जब उसे कॉल डिटेल्स दिखाई गईं, तो उसने सच उगल दिया। इस खुलासे के बाद ही अभिषेक प्रकाश पर शिकंजा कसा गया।

निकांत जैन के दफ्तर की तलाशी: निलंबित IAS अभिषेक प्रकाश के कहने पर रिश्वत मांगने के आरोपी निकांत जैन के विराट खंड स्थित दफ्तर की रविवार को कई फाइलें खंगाली गईं। उन फाइलों का ब्योरा पुलिस ने तैयार किया, जिसमें कई कंपनियों से बड़ा लेन-देन किया गया है। अब इस दफ्तर में जल्दी ही विजिलेंस और ED के अधिकारी छानबीन करेंगे। इसलिए दफ्तर को इन दोनों एजेंसियों की कार्रवाई होने तक सील रखा जाएगा।

अभिषेक प्रकाश का करियर: अभिषेक प्रकाश 2006 बैच के IAS अधिकारी हैं। वह लखीमपुर खीरी, लखनऊ, अलीगढ़ और हमीरपुर जिलों के जिलाधिकारी रह चुके हैं। निलंबन से पहले, वह सचिव, यूपी सरकार, आईडीसी विभाग एवं सीईओ इन्वेस्ट यूपी का चार्ज संभाल रहे थे।

सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती: उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में की गई त्वरित कार्रवाई से सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति स्पष्ट होती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार स्वीकार्य नहीं होगा, और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।