वाशिंगटन, 28 मार्च 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत की मतदाता पहचान प्रणाली की प्रशंसा करते हुए अमेरिकी चुनाव प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें अमेरिकी चुनावों में मतदाता पहचान को मजबूत करने के लिए भारत के उदाहरण का उल्लेख किया गया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत और ब्राजील जैसे देश मतदाता पहचान को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ रहे हैं, जबकि अमेरिका अभी भी नागरिकता के लिए स्व-सत्यापन पर निर्भर है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जर्मनी और कनाडा में मतों की गिनती के लिए कागजी मतपत्रों का उपयोग किया जाता है, जिससे विवादों की संख्या कम होती है, जबकि अमेरिका में विभिन्न तरीकों के कारण सुरक्षा की कमी है।
अमेरिकी चुनाव प्रणाली में सुधार की आवश्यकता: राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी चुनावों में मतदाता पहचान को मजबूत करने के लिए एक कार्यकारी आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत, संघीय चुनावों में मतदान करने के लिए नागरिकता का प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका को आधुनिक, विकसित और विकासशील देशों द्वारा अपनाई गई बुनियादी और आवश्यक चुनाव सुरक्षा को लागू करना चाहिए।
राष्ट्रपति ट्रंप ने डेनमार्क और स्वीडन का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों में डाक द्वारा मतदान केवल उन लोगों तक सीमित है जो व्यक्तिगत रूप से मतदान करने में असमर्थ हैं, और देर से प्राप्त होने वाले मतपत्रों की गिनती नहीं की जाती है। इसके विपरीत, अमेरिका में डाक द्वारा बड़े पैमाने पर मतदान होता है, जिसमें बिना डाक टिकट वाले मतपत्र या चुनाव के दिन के बाद प्राप्त होने वाले मतपत्रों को स्वीकार किया जाता है।
भारत में, निर्वाचन आयोग मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने की संभावना तलाश रहा है, जिसमें बायोमेट्रिक डेटाबेस शामिल है। चुनाव आयोग ने कहा है कि इस तरह के अभ्यास के लिए उसके विशेषज्ञों और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के बीच तकनीकी परामर्श जल्द शुरू होगा।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यह पहल दर्शाती है कि अमेरिका अपने चुनाव प्रणाली में सुधार की दिशा में गंभीरता से विचार कर रहा है, और इस संदर्भ में भारत की उन्नत मतदाता पहचान प्रणाली एक प्रेरणास्रोत बन रही है।