कर्तव्यपथ

देश के लिए 'औरंगजेब जैसी मानसिकता' खतरनाक: आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का बयान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने 23 मार्च 2025 को बेंगलुरु में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के समापन पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 'औरंगजेब जैसी मानसिकता' देश के लिए खतरनाक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को उन व्यक्तियों को आदर्श मानना चाहिए जो भारतीय मूल्यों का समर्थन करते हैं, न कि आक्रमणकारी सोच रखने वालों को।

दत्तात्रेय होसबाले ने औरंगजेब की कब्र को लेकर उठे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत में आक्रमणकारी मानसिकता वाले लोगों को आदर्श नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि औरंगजेब का महिमामंडन किया गया, जबकि उनके भाई दारा शिकोह, जो सामाजिक सद्भाव में विश्वास करते थे, उन्हें भुला दिया गया। होसबाले ने कहा, "भारत के मूल्यों के खिलाफ जाने वाले लोगों को आदर्श बनाया गया, जो सही नहीं है।

धर्म आधारित आरक्षण का विरोध: कर्नाटक सरकार द्वारा मुसलमानों को सरकारी ठेकों में 4 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले पर होसबाले ने कहा कि भारतीय संविधान धर्म आधारित आरक्षण की इजाजत नहीं देता। उन्होंने कहा कि इस तरह का आरक्षण डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखित संविधान के खिलाफ है। होसबाले ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में अविभाजित आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में ऐसे प्रयासों को उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया था।

आरएसएस और भाजपा के संबंध: प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा अध्यक्ष के चयन पर पूछे गए सवाल के जवाब में होसबाले ने स्पष्ट किया कि आरएसएस और भाजपा स्वतंत्र संगठन हैं, और भाजपा अपने अध्यक्ष का चयन अपनी प्रक्रिया के तहत करती है। उन्होंने कहा, "हमें कोई प्रचारक (भाजपा में) भेजने की मंशा नहीं है। सभी संगठन स्वतंत्र हैं और अपनी प्रक्रिया के तहत अपने अध्यक्ष चुनाव करने के लिए स्वतंत्र हैं।

जातिगत जनगणना पर विचार: जातिगत जनगणना के मुद्दे पर होसबाले ने कहा कि समाज में जाति-बिरादरी के आधार पर झगड़े नहीं होने चाहिए। उन्होंने उदाहरण दिया कि जब कोई खिलाड़ी मेडल जीतता है या सैनिक शहीद होता है, तो हम उसकी जाति या धर्म नहीं देखते, बल्कि गर्व महसूस करते हैं। यह सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है।

आरएसएस का उद्देश्य: होसबाले ने कहा कि आरएसएस का उद्देश्य समाज को एकजुट करना और राष्ट्र की सेवा में समर्पित होना है। उन्होंने कहा कि आरएसएस के शताब्दी वर्ष को आत्मनिरीक्षण और समाज को संगठित करने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि उत्सव के रूप में।

दत्तात्रेय होसबाले के बयान ने देश में वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म दिया है। उनकी टिप्पणियाँ भारतीय समाज में समरसता और संविधान के मूल्यों की रक्षा के प्रति आरएसएस की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।