नई दिल्ली, 30 मार्च 2025: संसदीय स्थायी समिति ने हाल ही में प्रस्तुत अपनी 145वीं रिपोर्ट में अधिकारियों के एक ही पद पर लंबे समय तक तैनाती को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समिति का मानना है कि यह प्रवृत्ति भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है और प्रशासनिक कार्यक्षमता को प्रभावित करती है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
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नियमित स्थानांतरण की आवश्यकता: समिति ने पाया कि कई मंत्रालयों और विभागों में अधिकारियों का नियमित स्थानांतरण नहीं हो रहा है, जिससे वे एक ही पद पर 8-9 वर्षों तक बने रहते हैं। विशेष रूप से आर्थिक और संवेदनशील मंत्रालयों में यह प्रवृत्ति अधिक देखी गई है।
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भ्रष्टाचार की संभावना: लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती से अधिकारियों को अनुचित लाभ उठाने और भ्रष्टाचार में लिप्त होने का अवसर मिलता है। समिति ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों के खिलाफ है।
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स्थानांतरण नीति का पालन: रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि बारी-बारी से स्थानांतरण की नीति होने के बावजूद, इसका पूर्ण रूप से पालन नहीं किया जा रहा है। कुछ मामलों में, अधिकारियों ने अपनी तैनाती इस तरह से सुनिश्चित की है कि उनका पूरा कार्यकाल एक ही मंत्रालय में बीत रहा है। समिति ने इसे तत्काल सुधारने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
समिति की सिफारिशें:
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नियमित स्थानांतरण: सभी मंत्रालयों और विभागों में अधिकारियों के नियमित और समयबद्ध स्थानांतरण को सुनिश्चित किया जाए, ताकि वे निर्धारित समयसीमा से अधिक किसी एक पद पर न रहें।
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स्थानांतरण नीति का कड़ाई से पालन: स्थानांतरण से संबंधित नीतियों का सख्ती से अनुपालन हो और किसी भी प्रकार की छूट या अपवाद को न्यूनतम रखा जाए।
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निगरानी और समीक्षा: एक स्वतंत्र निकाय द्वारा स्थानांतरण प्रक्रियाओं की नियमित निगरानी और समीक्षा की जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि नीतियों का सही ढंग से पालन हो रहा है।
प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कदम:
समिति का मानना है कि इन सिफारिशों के कार्यान्वयन से प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ेगी। इसके साथ ही, यह कदम भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में भी सहायक होगा, जिससे जनता का प्रशासन पर विश्वास मजबूत होगा।