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UP Politics: विधायक का अपमान या अफसरशाही की उदासीनता? चाय विवाद से गरमाई सियासत

बरेली जिले के आंवला विधायक राजेश वर्मा ने BDO सुमन सिंह पर चाय न परोसने का आरोप लगाया, जिससे वे अपमानित महसूस कर रहे हैं। यह मामला अफसरशाही और जनप्रतिनिधियों के बीच संबंधों पर सवाल खड़ा कर रहा है और विधानसभा में चर्चा का विषय बन सकता है।

लखनऊ, 31 मार्च 2025: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। बरेली जिले के आंवला विधानसभा क्षेत्र के विधायक राजेश वर्मा के साथ हुई एक घटना ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। जानकारी के अनुसार, विधायक वर्मा जब क्षेत्र के विकास कार्यों की समीक्षा के लिए ब्लॉक कार्यालय पहुंचे, तो वहां की खंड विकास अधिकारी (BDO) सुमन सिंह ने उन्हें चाय तक नहीं पूछी, जिससे विधायक अपमानित महसूस कर रहे हैं।

विधायक का आरोप: विधायक राजेश वर्मा का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति जानने के लिए ब्लॉक कार्यालय का दौरा किया था। लेकिन वहां पहुंचने पर BDO सुमन सिंह ने न केवल उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया, बल्कि चाय-पानी तक की पेशकश नहीं की। वर्मा ने इसे जनप्रतिनिधि का अपमान बताते हुए कहा कि यह अफसरशाही की हठधर्मिता का प्रतीक है।

BDO का पक्ष: दूसरी ओर, BDO सुमन सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उस समय कार्यालय में अत्यधिक कार्यभार था, जिसके कारण वे विधायक जी का उचित स्वागत नहीं कर पाईं। उन्होंने कहा कि यह एक अवांछित भूल थी और इसका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था।

राजनीतिक : इस घटना के बाद, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता करार दिया है, जबकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

विधानसभा में तलब: सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर आगामी विधानसभा सत्र में चर्चा हो सकती है, और BDO सुमन सिंह को स्पष्टीकरण के लिए तलब किया जा सकता है। यह मामला जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच संबंधों पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर रहा है।

जनता : स्थानीय जनता में भी इस घटना को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे विधायक का अहंकार मानते हैं, जबकि अन्य इसे अफसरशाही की उदासीनता के रूप में देख रहे हैं।

यइस विवाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या विधानसभा में इस पर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है।ह घटना प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच सामंजस्य की कमी को उजागर करती है। दोनों पक्षों को चाहिए कि वे आपसी सम्मान और सहयोग के साथ कार्य करें, ताकि जनता के हित में विकास कार्य सुचारु रूप से चल सकें।