पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के सम्मान में स्मारक बनाने की मांग पर सियासत गर्म हो गई है। कांग्रेस नेता और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कांग्रेस पर भेदभाव का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने हमेशा कुछ चुनिंदा नेताओं को प्राथमिकता दी है, जबकि अन्य के योगदान को नजरअंदाज किया है।
शर्मिष्ठा मुखर्जी का बयान:
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह का योगदान देश के लिए अविस्मरणीय है। उनके सम्मान में स्मारक की मांग जायज है, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने कई बार ऐसे नेताओं को नजरअंदाज किया है जिन्होंने देश के विकास में अहम भूमिका निभाई। यह भेदभाव बंद होना चाहिए।”
कांग्रेस पर गंभीर आरोप:
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में हमेशा गांधी परिवार से जुड़े नेताओं को प्राथमिकता दी जाती है। “पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं, जैसे मेरे पिता प्रणब मुखर्जी और अब डॉ. मनमोहन सिंह के योगदान को उचित सम्मान नहीं दिया गया। यह केवल उनकी विरासत को दबाने का प्रयास है,” शर्मिष्ठा ने कहा।
स्मारक की मांग का समर्थन:
शर्मिष्ठा ने स्मारक की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह जैसे नेताओं के लिए स्मारक देश की जनता को उनकी सेवाओं की याद दिलाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम होगा। उन्होंने सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की अपील की।
कांग्रेस का जवाब:
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने शर्मिष्ठा मुखर्जी के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “कांग्रेस हमेशा अपने सभी नेताओं के योगदान को सम्मान देती है। यह व्यक्तिगत आरोप निराधार हैं और पार्टी की छवि को धूमिल करने का प्रयास है।”
स्मारक के पीछे की राजनीति:
डॉ. मनमोहन सिंह के लिए स्मारक बनाने की मांग एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। जहां कांग्रेस के अंदर से ही असंतोष की आवाजें उठ रही हैं, वहीं अन्य राजनीतिक दल भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। बीजेपी ने इसे कांग्रेस की अंदरूनी कलह का नतीजा बताया है।
जनता की प्रतिक्रिया:
सोशल मीडिया पर यह मुद्दा जोर पकड़ रहा है। कुछ लोग शर्मिष्ठा मुखर्जी के बयान का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ इसे उनकी व्यक्तिगत नाराजगी का नतीजा मान रहे हैं।
डॉ. मनमोहन सिंह का योगदान:
डॉ. मनमोहन सिंह ने 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी आर्थिक नीतियों ने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई। ऐसे नेता के लिए स्मारक बनाने की मांग पर राजनीति होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और सरकार डॉ. मनमोहन सिंह के योगदान को सम्मान देने के लिए कोई पहल करती है या नहीं।