जुर्म

उत्तराधिकार की लड़ाई में औरंगजेब की क्रूरता: भाई दारा शिकोह की हत्या और शाहजहाँ की प्रतिक्रिया

1657 में शाहजहाँ की बीमारी के बाद, उनके पुत्रों के बीच सत्ता संघर्ष हुआ। सामूगढ़ के युद्ध में औरंगजेब ने दारा शिकोह को पराजित किया और बाद में उनका सिर कलम करवा कर शाहजहाँ को भेज दिया, जो पहले से ही आगरा किले में कैद थे।

मुगल साम्राज्य के इतिहास में सत्ता के लिए संघर्ष और पारिवारिक कलह के कई उदाहरण मिलते हैं, लेकिन औरंगजेब द्वारा अपने भाई दारा शिकोह के साथ किया गया व्यवहार विशेष रूप से क्रूरता की पराकाष्ठा दर्शाता है।

शाहजहाँ की बीमारी और उत्तराधिकार की लड़ाई: 1657 में मुगल बादशाह शाहजहाँ गंभीर रूप से बीमार पड़ गए, जिससे उनके चारों पुत्रों—दारा शिकोह, औरंगजेब, शाह शुजा, और मुराद बख्श—के बीच सत्ता संघर्ष तेज हो गया। शाहजहाँ ने अपने बड़े बेटे दारा शिकोह को उत्तराधिकारी घोषित किया था, लेकिन अन्य भाइयों ने इसे स्वीकार नहीं किया।

सामूगढ़ का युद्ध और दारा शिकोह की पराजय: 30 मई 1658 को आगरा के निकट सामूगढ़ में दारा शिकोह और औरंगजेब के बीच निर्णायक युद्ध हुआ। प्रारंभ में दारा की सेना ने मजबूती से मुकाबला किया, लेकिन एक अफवाह के कारण सेना में भ्रम फैल गया। दारा शिकोह के हाथी से उतरने के बाद सैनिकों ने सोचा कि वे मारे गए या पकड़े गए हैं, जिससे उनकी सेना का मनोबल टूट गया और अंततः दारा शिकोह को पराजय का सामना करना पड़ा।

दारा शिकोह की गिरफ्तारी और हत्या: पराजय के बाद, दारा शिकोह विभिन्न स्थानों पर शरण लेते रहे, लेकिन अंततः उन्हें पकड़कर दिल्ली लाया गया। औरंगजेब ने उन पर धर्मद्रोह और बगावत के आरोप लगाए और 30 अगस्त 1659 को उनका सिर कलम करवा दिया।

शाहजहाँ को भेजा गया सिर: औरंगजेब की क्रूरता यहीं समाप्त नहीं हुई। उसने दारा शिकोह का सिर एक तश्तरी में रखकर अपने पिता शाहजहाँ के पास आगरा के किले में भेजा, जो पहले से ही वहां कैद थे। इस घटना ने शाहजहाँ को गहरे सदमे में डाल दिया।

  मुगल इतिहास में यह घटना सत्ता के लिए पारिवारिक संघर्ष की चरम सीमा को दर्शाती है। औरंगजेब की सत्ता प्राप्ति की यह कहानी उसकी कठोरता और निर्दयता का प्रतीक बन गई, जिसने मुगल साम्राज्य की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित किया।