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वक्फ संशोधन विधेयक 2025: सरकार का दृढ़ रुख, अमित शाह बोले- इसी सत्र में पेश होगा बिल

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि वक्फ संशोधन विधेयक 2025 संसद के मौजूदा सत्र में ही पेश किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष पर मुसलमानों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस विधेयक से किसी के अधिकारों का हनन नहीं होगा।​

केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि यह विधेयक संसद के वर्तमान सत्र में ही पेश किया जाएगा, जो 4 अप्रैल 2025 को समाप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून से किसी को डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह संविधान के दायरे में रहकर तैयार किया गया है।

विपक्ष पर आरोप:

अमित शाह ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे मुसलमानों को गुमराह कर रहे हैं और झूठे प्रचार के माध्यम से विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "विपक्ष मुसलमानों को गुमराह कर रहा है। मुसलमानों के किसी भी अधिकार पर अंकुश नहीं लगाया जाएगा। वे सिर्फ झूठ पर झूठ बोल रहे हैं।

विधेयक की आवश्यकता:

गृह मंत्री ने बताया कि मौजूदा कानून तुष्टीकरण की राजनीति के कारण बनाया गया था, जिसमें कई प्रावधान संविधान की भावना के अनुरूप नहीं थे। उन्होंने कहा, "हमने वक्फ विधेयक को संविधान के दायरे में रखा है, जबकि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए कानून को तोड़-मरोड़ कर पेश किया था।

विरोध और प्रदर्शन: विधेयक के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों पर शाह ने कहा कि हर किसी को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन किसी भी विवाद को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। उन्होंने कहा, "वे विरोध करने के लिए स्वतंत्र हैं। यदि विधेयक संविधान के दायरे में नहीं है, तो इसे अदालतों में चुनौती दी जा सकती है।

संवेदनशील संपत्तियों का मामला: अमित शाह ने बताया कि वक्फ बोर्ड ने दिल्ली में 123 प्रमुख स्थानों को वक्फ संपत्ति घोषित किया है और प्रयागराज में ऐतिहासिक चंद्रशेखर आजाद पार्क को भी वक्फ संपत्ति घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से बनाए गए मौजूदा कानून के अनुसार इन फैसलों को अदालतों में चुनौती भी नहीं दी जा सकती।

  वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को लेकर केंद्र सरकार का रुख स्पष्ट है। गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह विधेयक संविधान के दायरे में रहकर तैयार किया गया है और इससे किसी के अधिकारों का हनन नहीं होगा। संसद के मौजूदा सत्र में इस विधेयक के पेश होने की संभावना है, जिससे संबंधित मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो सकेगी।